लोक संत जाम्भोजी ( जसनाथजी ) - Education Update

Wednesday, December 30, 2020

लोक संत जाम्भोजी ( जसनाथजी )

 संत जांभोजी



 संत जांभोजी का जन्म 1451 ईस्वी कौन नागौर के पीपासर गांव में पंवार वंश में हुआ था।

 संत जांभोजी को कृष्ण का अवतार माना जाता है।

 जांभोजी ने संत 1485 में समराथल बीकानेर में विश्नोई संप्रदाय स्थापना की थी।

 इसी दिन जांभोजी ने पर्यावरण संबंधी व अन्य समाज सुधारक नियम दिए थे, इन्होंने 20+9=29 नियम दिए थे।  जिसमें से 21 नियम पर्यावरण संबंधी है उन्हें पर्यावरण वैज्ञानिक भी कहा जाता है

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 जांभोजी के ग्रंथ

 जांभोजी के द्वारा जब संहिता जंप सागर शब्दवाणी और विश्नोई धर्म प्रकाश आदि ग्रंथ भी लिखे थे। इसके अलावा 120 शब्दवाणी अभी संग्रहित है।

 जांभोजी ने 1526 ईसवी में त्रयोदशी के दिन मुकाम तालवा नामक गांव नोखा बीकानेर मैं समाधि ली थी।

 जांभोजी के 6 देवालय

 पीपासर नागौर

 मुक्तिधाम मुकाम का तालवा नोखा बीकानेर

 लालासर

 जांबा

 जांगलू

 रामदावास

 इन्होंने हिंदू तथा मुस्लिम धर्म में व्याप्त भ्रमित और आडंबरो  का विरोध किया।

 गुरु जंभेश्वर के श्री मुख से उतरी तो वाणी को शब्दवाणी जंबो वाणी एवं गुरु वाणी कहा  जाता है जंभ वाणी में कुल 123 शब्द है, जांभोजी की काव्य परंपरा में शब्दवणी को देवानी दिखा जाता है गुरु जंभेश्वर की वाणी के ज्ञात 151 शब्द जो एक गुरु के रूप में संकलित है को जब गीता कहा जाता है विश्नोई संप्रदाय इसे पांचवा वेद मानते हैं

 गुरु जंभेश्वर ने पहल नामक अभिमंत्रित जल को आज्ञा अनुवर्ती समुदाय को पिला कर उन्हें विश्नोई पंत में दीक्षित किया था।

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बीकानेर जहां जांभोजी के द्वारा विश्नोई संप्रदाय की स्थापना

की गई को धोक धोरा नाम से भी जाना जाता है

 जांभोजी के धाम

पीपासर - नागौर जिले में स्थित इस स्थान पर जांभोजी का जन्म हुआ था।

रामड़ावास - जोधपुर जिले में पीपाड़ के समीप रामड़ावास तथा लोहावट स्थानों पर जांभोजी ने उपदेश दिए थे।

मुकाम - बीकानेर जिले के नोखा तहसील में मुकाम नामक स्थान पर संत जांभोजी ने समाधि ली थी इसी की स्मृति में प्रति वर्ष आश्विन में फाल्गुन अमावस्या को मेला भरता है।

लालसर - बीकानेर जिले में स्थित लालासर में जांभोजी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।

जाम्भा - जोधपुर जिले की फलोदी तहसील में स्थित जांबा गांव विश्नोई संप्रदाय के लिए पुष्कर की तरह पवित्र तीर्थ स्थल है यहां हर वर्ष चित्र अमावस्या एवं भादवा की पूर्णिमा को मेला भरता है।

रोटू - नागौर जिले में स्थित रोटू विश्नोई संप्रदाय का आराधी स्थल है।

जांगलू - बीकानेर जिले की नोखा तहसील के जंगलों में प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या एवं भादवा की अमावस्या को मेला भरता है।

लोदीपुर - उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित लोदीपुर में जांभोजी भ्रमण पर गए थे।


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